असम के गांवों में कब्जा हटाओ अभियान: ग्रामीणों का आरोप – हमारा सब कुछ जला दिया, अब बच्चों के साथ खेत में सो रहे हैं

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गुवाहाटी15 मिनट पहलेलेखक: दिलीप कुमार शर्मा

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स्थानीय प्रशासन का दावा-77 हजार बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है। - Dainik Bhaskar

स्थानीय प्रशासन का दावा-77 हजार बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है।

असम के दरंग जिले के धौलपुर गांव में राज्य सरकार के बेदखली अभियान के दौरान हुई हिंसक झड़प के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस प्रशासन के डर से गांव के लोग सुता नदी के किनारे अपने बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के साथ एल्युमिनियम की चादर से बने अस्थायी छत के नीचे डेरा डाले हुए हैं। सिपाझार शहर से भीतर करीब 14 किमी पर पड़ने वाली नो और सुता नदी के बीच के इलाके में 3 नंबर धौलपुर गांव में प्रवेश करते ही तोड़े और जलाए गए सैकड़ों घर नजर आते हैं।

कुछ लोग बचा-खुचा सामान नदी के रास्ते दूसरी जगह ले जा रहे हैं। लेकिन अधिकतर बेघर हुए लोग खुले आसमान के नीचे खेतों में अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ रह रहे हैं। जिला प्रशासन का दावा है कि दरंग की सिपाझार तहसील के अंतर्गत 77 हजार बीघा सरकारी जमीन पर लोगों का कब्जा है। लेकिन गांव वालों का कहना है कि वे करीब 40-50 वर्ष से इस चर इलाके (नदी तट) में बसे हैं। 23 सितंबर को अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान पुलिस-प्रशासन और स्थानीय लोगों में हिंसक झड़प हुई थी।

सुता नदी के किनारे गांव में झोपड़ों से रोने की आवाज आ रही थी। यहां पुलिस गोली से मरने वाले मोइनुल हक (28) का परिवार रहता है। एक कैमरामैन के मोइनुल पर कूदने का वीडियो काफी चर्चा का विषय रहा था। मोइनुल की मां मोइमोना बेगम रोते हुए कहती हैं कि मुझे अपना बेटा चाहिए। मेरे बेटे के साथ बहुत बुरा किया। 3 नंबर गांव की 38 साल की मेसरन बेगम कहती हैं कि पिछली रात हम बच्चों को लेकर खेत में सोए थे। मुझे पता नहीं, अब आगे क्या करूंगी। हम वोट देते हैं।

हम सबका नाम एनआरसी में है। अब हमारे सारे कागजात जला दिए गए हैं। धौलपुर गांव में जले हुए मकानों में कुछ महिलाएं अपने उजड़े आशियानों के बाहर घर का बचा-खुचा सामान तलाश रही थीं। दूसरी तरफ, गांव के दौरे पर आए असम प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेन बोरा का कहना है कि निर्दोषों की हत्या करने के लिए हम राज्य सरकार को लाइसेंस नहीं दे सकते।

असम के मुख्यमंत्री भय का माहौल पैदा कर रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि हम सरकारी जमीन पर कब्जे की ढील नहीं दे सकते। कल को कोई कामाख्या मंदिर पर कब्जा करेगा, तो मैं कुछ नहीं कर पाऊंगा, ये मानने वाली बात नहीं है। मुख्यमंत्री सरमा ने चर इलाके की सरकारी जमीन से कब्जे हटाने के लिए प्रोजेक्ट गोरुखुटी शुरू किया है।

हम असम के, राज्य सरकार हमारी नागरिकता जांच ले: ग्रामीण

ग्रामीणों का आरोप है कि 3 मस्जिदों और एक मदरसे को भी तोड़ दिया गया। दो नंबर धौलपुर गांव के अमर अली कहते हैं कि हमारे घर के पास तोड़ी गई मस्जिद में नमाज पढ़ी जाती थी। दो नंबर गांव के ही मोहम्मद तायेत कहते हैं- इस सरकारी जमीन पर लोग 60-70 साल से बसे हैं। सरकार ने इतने दिनों तक कुछ नहीं किया। यदि सरकार चाहेगी तो हम जमीन छोड़ने को तैयार हैं। हम असम के ही हैं। सरकार हमारे नागरिकता के दस्तावेज जंचवा ले।

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