कूड़े और पानी के बिलों को माफ करने के लिए शिमला नागरिक सभा ने नगर निगम के बाहर तीन घंटे किया प्रदर्शन

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शिमला14 मिनट पहले

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नागरिक सभा के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व सचिव कपिल शर्मा ने कहा है कि कोरोना महामारी के इस दौर में मार्च से सितंबर के छःमहीनों में कोरोना महामारी के कारण शिमला शहर के 70 प्रतिशत लोगों का रोज़गार पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से चला गया है।

  • नागरिक सभा का प्रतिनिधिमंडल नगर निगम शिमला के आयुक्त से मिला व उन्हें 13 सूत्री ज्ञापन सौंपा
  • आयुक्त ने बिलों को लेकर सभा की मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया।

मंगलवार को शिमला नागरिक सभा ने नगर निगम के बाहर तीन घंटे तक प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कोरोना काल में कूड़े, पानी के बिलों, प्रॉपर्टी टैक्स को माफ करने, येलो लाइन के 6 सौ रुपए और अन्य पार्किंग शुल्क को एक हजार रुपए से घटाने व दुकानदारों से वसूले जाने वाले प्रॉपर्टी टैक्स के मुद्दे को लेकर था। इसके बाद नागरिक सभा का प्रतिनिधिमंडल नगर निगम शिमला के आयुक्त से मिला व उन्हें 13 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।आयुक्त ने बिलों को लेकर सभा की मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही येलो लाइन व अन्य पार्किंग शुल्क को घटाने का भी आश्वासन दिया।

नागरिक सभा के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व सचिव कपिल शर्मा ने कहा है कि कोरोना महामारी के इस दौर में मार्च से सितंबर के 6 महीनों में कोरोना महामारी के कारण शिमला शहर के 70 प्रतिशत लोगों का रोज़गार पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से चला गया है। हिमाचल प्रदेश सरकार व नगर निगम शिमला ने कोरोना काल में आर्थिक तौर पर बुरी तरह से प्रभावित हुई जनता को कोई भी आर्थिक सहायता नहीं दी है।

शिमला शहर में होटल व रेस्तरां उद्योग पूरी तरह ठप हो गया है। इसके कारण इस उद्योग में सीधे रूप से कार्यरत लगभग पांच हजार मजदूरों की नौकरी चली गई है। पर्यटन का काम बिल्कुल खत्म हो गया है। इसके चलते शिमला शहर में हज़ारों टैक्सी चालकों, कुलियों, गाइडों, टूअर एंड ट्रैवल संचालकों आदि का रोज़गार खत्म हो गया है। इस से शिमला में कारोबार व व्यापार भी पूरी तरह खत्म हो गया है क्योंकि शिमला का लगभग चालीस प्रतिशत व्यापार पर्यटन से जुड़ा हुआ है व पर्यटन उद्योग पूरी तरह बर्बाद हो गया है।

हजारों रेहड़ी फड़ी तहबाजारी व छोटे कारोबारी तबाह हो गए हैं। दुकानों में कार्यरत सैकड़ों सेल्समैन की नौकरी चली गई है। विभिन्न निजी संस्थानों में कार्यरत मजदूरों व कर्मचारियों की छंटनी हो गई है। निजी कार्य करने वाले निर्माण मजदूरों का काम पूरी तरह ठप हो गया है। फेरी का कार्य करने वाले लोग भी पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। ऐसी स्थिति में शहर की आधी से ज्यादा आबादी को दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है।

ऐसी विकट परिस्थिति में प्रदेश सरकार और नगर निगम से जनता को आर्थिक मदद की जरूरत व उम्मीद थी, परंतु इन्होंने जनता से किनारा कर लिया है। जनता को कूड़े के हज़ारों रुपए के बिल थमा दिए गए हैं। बंद क्वार्टरों के हर महीने के कूड़े व पानी के बिल जबरन मकान मालिकों से वसूले जा रहे हैं। हर माह जारी होने वाले बिलों को चार महीने बाद जारी किया जा रहा है। उपभोक्ताओं को कूड़े व पानी के बिल हज़ारों में थमाए गए हैं जिस से घरेलू लोग तो हताहत हुए ही हैं परन्तु कारोबारियों, व्यापारियों,जिम्नेजियम,पीजी संचालकों आदि पर पहाड़ जैसा बोझ लाद दिया गया है।

मुख्य मांगें

1. कोरोना काल के कूड़े के बिलों को माफ किया जाए।

2. कोरोना काल के पानी के बिलों को माफ किया जाए।

3. कूड़े व पानी के बिल हर महीने जारी किए जाएं।

4. पीजी,जिम,रेहड़ी फड़ी तयबजारी व छोटे दुकानदारों से हज़ारों रुपए के कूड़े के बिल वसूलना बंद किया जाए। उनके बिलों को तर्कसंगत बनाया जाए।

5. हर साल कूड़े व पानी के बिलों में 10% की वृद्धि पर रोक लगाई जाए।

6. अंतिम तारीख के बाद पानी के बिलों में 10% एक्स्ट्रा चार्ज बंद किए जाएं।

7. चार महीने के इकट्ठे पानी बिल की जगह हर महीने पानी बिल जारी किए जाएं।

8. कूड़े,पानी व प्रोपर्टी टैक्स की दरों में कटौती की जाए।

9. दिल्ली की तर्ज़ पर 20 हज़ार लीटर पानी मुफ्त उपलब्ध करवाया जाए।

10. कूड़े व पानी के निजीकरण की साज़िश बंद की जाए।

11. नगर निगम की दुकानों,स्टॉलों,गोदामों व अन्य संपत्तियों पर लगाए गए प्रोपर्टी टैक्स को वापिस लिया जाए।

12. कोरोना महामारी के दौरान क्वार्टरों में रहने वाले बहुत सारे लोग अपने पुश्तैनी घरों को कूच कर चुके हैं अतः उनकी बन्द रिहाइशों का कूड़े व पानी का बिल मकान मालिकों से न वसूला जाए।

13. येलो लाइन व अन्य पार्किंग शुल्कों में कटौती की जाए।

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