चार साल में नहीं बन पाई छह किलोमीटर सड़क, मरीजों को चारपाई में ढोकर पहुंचाना पड़ता है वाहन योग्य सड़क तक

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आनी12 घंटे पहले

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दुर्घटना में घायल और उपचाराधीन पंचायत समिति आनी के पूर्व अध्यक्ष यज्ञदत्त ठाकुर को अस्पताल लाने के लिए चारपाई पर लाते लोग

  • सड़क का काम 25 फीसदी लेकिन विभाग ने ठेकेदार को किया 70 प्रतिशत का भुगतान
  • निर्माणाधीन डीम से रुमाली सड़क पर ग्रामीणों ने उठाये सवाल

पीडब्ल्यूडी के निरमंड मंडल के दलाश सब डिवीजन के तहत निर्माणाधीन सड़क रुमाली से डीम के निर्माण कार्य पर क्षेत्र की जनता ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सवा 6 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य किया जाना था जबकि कछुआ गति से चल रहे कार्य के चलते अभी तक 20 से 30 प्रतिशत ही काम ठेकेदार ने किया है। जबकि विभाग ठेकेदार को करीब 60 से 70 प्रतिशत का भुगतान कर भी चुका है। पंचायत समिति आनी के पूर्व उपाध्यक्ष यज्ञदत्त ठाकुर सहित पूर्व प्रधान जवाहर लाल, पूर्व प्रधान रामलाल पूर्व वार्ड पंच ठाकुर दविंदर सिंह, डीम बूथ के बीएलए डावे राम, बूथ अध्यक्ष धर्मदास, केहर सिंह, डीम गांव के वार्ड सदस्य गोपाल दास, राम सिंह, रोशन लाल, विक्रम राज धनीराम आदि का आरोप है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब 88 लाख रुपए की अनुमानित लागत से बन रही इस सड़क का 2016 में भूमिपूजन किया गया था। जबकि सड़क का निर्माण कार्य जुलाई 2018 में पूरा कोया जाना था। जो आज तक भी पूरा नहीं हुआ है।

इस सड़क के निर्माण से बुछैर और लझेरी पंचायतों के दुर्गम गांवों शिलआरण, थनाच, उपरला थनाच, अनुसूचित जाति की बस्ती जाखनाली, खवाड़ी, जाजू, डीम, छलाली और बांडा आदि गांवों की करीब 1200 आबादी लाभान्वित होनी थी। लेकिन विभाग और ठेकेदार की ढिलाई के चलते सवा 6 किलोमीटर लंबी इस सड़क का 4 सालों में मात्र 2 से ढाई किलोमीटर ही काम हो पाया है। गांव की जनता को अभी भी आपातकाल में मरीज को कई किलोमीटर तक चारपाई पर उठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ रहा है। जबकि सेब सीजन में सेब की एक क्रेट का सड़क तक पहुंचाने का भाड़ा ही 100 रुपए देना पड़ रहा है। यज्ञदत्त ठाकुर का कहना है कि सड़क की स्थिति से अवगत करवाने को लेकर ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल कई बार पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन से निरमंड जाकर मिला। जबकि हैरानी इस बात की है कि एसई से रामपुर में मिलने पर बताया गया कि सड़क का काम लगभग पूरा हो चुका है और ठेकेदार को करीब 2 करोड़ 15 लाख रुपयों का 60 से 70 प्रतिशत की राशि का भुगतान भी किया जा चुका जो कि विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है कि आखिर 20 से 30 प्रतिशत ही हुए काम का 70 प्रतिशत अगर भुगतान विभाग ने किया है तो कैसे ? ग्रामीणों ने इस सड़क के निर्माण कार्य और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही को लेकर उच्चाधिकारियों के खिलाफ भी जांच की मांग की है।

ठेकेदार से पत्राचार किया जा रहा है, साथ ही कानूनी पहलु पर भी गौर किया जा रहा है। जल्द ही सड़क निर्माण को लेकर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। -रजनीश बहल, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी, निरमंड मंडल

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