जिसे सूअर का दिल लगाया वह हिंसक अपराधी: डॉ. बरुआ बोले- अत्याचार मैं भुगत चुका, खुश हूं कि दुनिया ने माना- सूअर का दिल इंसान को लग सकता है

0
31
Quiz banner


  • Hindi News
  • National
  • Who Took The Heart Of A Pig Is The Violent Criminal Dr. Barua Said I Have Suffered Atrocities, I Am Happy That The World Has Accepted Human Can Feel The Heart Of A Pig

गुवाहाटी32 मिनट पहलेलेखक: आदित्य डी

  • कॉपी लिंक
डॉ. धनीराम बरुआ। - Dainik Bhaskar

डॉ. धनीराम बरुआ।

अमेरिका में हाल में जिस शख्स को सूअर का हार्ट प्रत्याराेपित किया गया, वह हिंसक अपराधी है। 57 साल के डेविड बेनेट नाम के इस व्यक्ति ने 1988 में एडवर्ड शुमेकर पर सात बार चाकू से हमला किया और उसे अपाहिज बना दिया था। इस हमले के लिए डेविड बेनेट जेल की सजा भी काट चुका है। डेविड को पिछले दिनों सूअर का दिल प्रत्यारोपित किया गया था। अब वह रिकवर हो रहा है।

इधर, भारत में असम के 72 साल के डॉक्टर धनी राम बरुआ ने 25 साल पहले 32 साल के एक व्यक्ति को सूअर का दिल प्रत्यारोपित किया था। हालांकि, मरीज बच नहीं पाया। डॉक्टर बरुआ को हार्ट ट्रांसप्लांट से जुड़े कानून को नजरअंदाज करने के आरोप में केस दर्ज किया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था। उन पर आज भी यह मामला चल रहा है।

मेरा किसी ने साथ नहीं दिया, आज भी मुकदमे झेल रहा
डॉक्टर धनीराम बरुआ कहते हैं- ‘मैंने 25 साल पहले इंसान के शरीर में सूअर का दिल लगाया था। अमेरिका के डॉक्टर अब यह काम कर रहे हैं। मैंने सौ से अधिक शोध कर इस बात का पता लगाया था और दुनिया को बताया था कि इंसान के शरीर में सूअर का दिल समेत कई अंग लग सकते हैं। क्योंकि सूअर और इंसान के अंगों में कई तरह की समानताएं हैं। दुनिया में सबसे पहले मैंने यह शोध और प्रयोग किया था।

जिस व्यक्ति को सूअर का दिल लगाया था वह सात दिन तक जीवित था। मेरे साथ उस दौरान हांगकांग के एक सर्जन डॉ. जोनाथन हो के-शिंग भी थे। मरीज की मौत के बाद हम दोनों को गैर इरादतन हत्या और मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम,1994 के तहत गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। उस दौरान मेरे सोनापुर स्थित हार्ट इंस्टीट्यूट में जमकर तोड़-फोड़ की गई और गुस्साए लोगों ने उनके लैब को तहस-नहस कर दिया और वाहनों को आग लगा दी।

आज पूरी दुनिया अमेरिकी डॉक्टरों के कारनामे को एक सफल प्रयोग के तौर पर देख रही है। लेकिन मेरा साथ किसी ने नहीं दिया। मुझे 40 दिन जेल में रखा गया। मुझ पर कई प्रतिबंध लगा दिए गए और मुझे हाउस अरेस्ट करके रखा गया। मुझे इस बात का दुख नहीं कि मुझ पर अत्याचार किए गए। खुशी है कि आखिर चिकित्सा विज्ञान के लोगों ने 25 साल बाद यह मान लिया कि इंसान के शरीर में सूअर के अंग ट्रांसप्लांट किए जा सकते हैं।’

खबरें और भी हैं…



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here