दलाईलामा को पद से हटाने को लेकर भ्रामक पत्रों से किया जा रहा निर्वासित तिब्बतियों में प्रचार,जांच में हुआ खुलासा

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धर्मशालाएक घंटा पहले

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दलाई लामा के खिलाफ चीन की एजेंसियां पिछले कुछ समय से भ्रामक प्रचार कर रही है। फाइल फोटो

  • माइक्रो-मैसेजिंग और सोशल मीडिया में वायरल हुआ दलाई लामा का फर्जी पत्र
  • पिछले काफी समय से चीनी की एजेंसियां दलाई लामा के खिलाफ भ्रामक प्रचार कर रही

तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा को उनके पद से हटाने और उनके बारे में पूरी जानकारी इकठ्ठा करने के लिए चीन के एक शख्स ने भारत में बौद्ध भिक्षुओं के बीच हवाला का जाल बुरी तरह फैला रखा था। चीन के इस शख्स का खुलासा प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किए गए चीनी व्‍यक्ति से जांच में किया है। इसी के चलते तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के नाम पर व्यापक रूप से परिचालित फर्जी पत्र माइक्रो-मैसेजिंग और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर सामने आया है।

दलाईलामा के खिलाफ भ्रामक पत्रों से प्रचार किया जा रहा

दलाईलामा के खिलाफ भ्रामक पत्रों से प्रचार किया जा रहा

दलाई लामा के निजी कार्यालय ने निर्वासित तिब्बतियों से सावधानी और सतर्कता बरतने का आग्रह किया है। तिब्बती भाषा में लिखे पत्र में लेखक ने छेड़खानी करते हुए निर्वासित तिब्बतियों से आगामी 2021 में होने वाले तिब्बती आम चुनावों में भाग लेने का आग्रह किया है।

केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के अध्यक्ष डॉ. लोबसंग सांग्ये का गुणगान किया गया है। दलाई लामा के निजी कार्यालय के अनुसार सोशल मीडिया में वायरल हो रहा दलाईलामा का पत्र फर्जी है। दलाई लामा के कार्यालय ने कहा कि यह पत्र फर्जी है। यह पत्र तिब्बती नेता की छवि को खराब करने और तिब्बती लोगों की एकता में फूट डालने के उद्देश्य से लिखा गया है।

तिब्बती जनता से भविष्य में भी फर्जी पत्रों से निपटने के लिए सतर्कता और सावधानी बरतने का आग्रह किया। पत्र में कहा गया है साल 2011 में राजनीतिक अधिकार हस्तांतरित करने के बाद से दलाई लामा ने तिब्बती समुदाय के राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया है।

फर्जी पत्र में लिखा गया है कि वर्तमान प्रधानमंत्री डा. लोबसंग सांग्ये ने बहुत अच्छा काम किया है। अगला निर्वासित प्रधानमंत्री भी सांग्ये के पदचिह्नों पर चले।तिब्बती लोगों को ऐसे नेता का चुनाव करना चाहिए जो निवर्तमान प्रधानमंत्री लोबसांग सांगये के कार्यों को जारी रख सके। दूसरी ओर, केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के अध्यक्ष डॉ. लोबसंग सांग्ये ने सोशल मीडिया में वायरल हो रहे दलाईलामा के इस फर्जी पत्र मामले की निंदा की है। उन्होंने कहा कि जिस किसी ने यह पत्र लिखा है, वह दुश्मनों के हाथ में खेल रहा है।

सांग्ये ने तिब्बती लोगों से विभाजनकारी कार्यों में शामिल हुए बिना आगामी चुनावों में भाग लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय तिब्बती प्रशासन इस फर्जी पत्र मामले की जांच कर रही है।

फ्रीलांस पत्रकार की गिरफ्तारी को लेकर सीटीए की कड़ी प्रतिक्रिया

दिल्ली में ऑफिशल सीक्रेट एक्ट के तहत फ्रीलांस पत्रकार राजीव शर्मा की गिरफ्तारी को लेकर केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। फ्रीलांस पत्रकार राजीव शर्मा की गिरफ्तारी के साथ, यह भी पता चला है कि राजीव शर्मा दलाई लामा की छवि खराब करने, सीटीए नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करने और मौद्रिक प्रोत्साहन के बदले में चीनी खुफिया एजेंसी को संवेदनशील जानकारी एकत्र करने के लिए अपने मीडिया क्रेडेंशियल्स का उपयोग कर रहे थे। राजीव शर्मा के साथ एक चीनी महिला किंग शि और उसके नेपाली साथी, राज भोरा, को भी कथित तौर पर “चीनी खुफिया जानकारी” के लिए शर्मा को भारी मात्रा में पैसे देने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

भारतीय रक्षा तैयारियों से जुड़े दस्तावेज बरामद

चीनी नागरिक लुओ सांग उर्फ चार्ली पेंग और चीनी मूल की महिला किंग शी पर स्पेशल सेल की नजर बनी हुई है। जांच एजेंसियों को शक है कि शी और पेंग के बीच भी रुपयों का लेनदेन हुआ। सर्च वारंट के बाद जब आरोपी पत्रकार राजीव शर्मा के घर की तलाशी ली गई तो वहां से भारत-चीन बॉर्डर पर भारतीय रक्षा तैयारियों से जुड़े 15 पेज के दो सेट दस्तावेज बरामद किए गए। इसमें सेना की तैयारियों, सैन्य बल की तैनाती, हथियारों को लेकर रणनीति और सीमा पर चीन के खिलाफ बनाई जा रही रणनीति से जुड़े कुछ दस्तावेज शामिल हैं।

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