प्रधानमंत्री मोदी कुछ देर बाद हिमाचल पहुंचेंगे, सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अटल टनल का लाहौल के लोगों को लाभ मिलेगा

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कुल्लू7 मिनट पहले

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अटल टनल का उद्घाटन करने मनाली पहुंचे पीएम का सीएम ने स्वागत किया।

  • 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनाई गई टनल से लोगों और सेना को लाभ होगा
  • पीएम सोलंगनाला व सिस्सू में जनसभाओं को संबोधित करेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज हिमाचल में 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनाई गई विश्व की सबसे लंबी अटल टनल का उद्घाटन करने के लिए पहुंचने वाले हैं। इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियां पूरी हो गई हैं। मोदी टनल के कुछ हिस्से में पैदल चलकर भी सफर करेंगे, जिसके लिए रेड कार्पेट बिछा दिया गया है।

प्रधानमंत्री अटल टनल उद्घाटन करने के बाद दो जनसभाओं को संबोधित करेंगे। उद्घाटन करने के बाद पीएम लाहौल की तरफ उत्तरी छोर की ओर सिस्सू पहुंचेंगे। जहां वे एक जनसभा को संबोधित करेंगे। उसके बाद पीएम साेलंगनाला में आयोजित एक दूसरी जनसभा को संबोधित करेंगे। दोनों सभाओं में 200-200 लोग शामिल होंगे। इस जनसभा में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।

देश की सबसे अहम इस टनल के बनने से मनाली से लेह की दूरी 46 किलोमीटर कम हो जाएगी और लाहौल के नागरिक सालभर मनाली और देश के अन्य हिस्सों से जुड़े रहेंगे। पहले बर्फबारी के कारण वे देश से 6 महीने के लिए पूरी तरह से कट जाते थे। 9.2 किलोमीटर की टनल बन जाने से लाहौल के लोगों की जिंदगी बदल जाएगी। अब मनाली से केलांग पहुंचने में मात्र 90 मिनट का समय लगेगा।

सेना के लिए यह टनल वरदान साबित होगी और सालभर सरहद पर सेना को बेरोकटोक सप्लाई जारी रह सकेगी। इस टनल के अंदर से सेना के बड़े-बड़े टैंक व अन्य साजो-सामान भी भेजा जा सकता है। 80 किलोमीटर की रफ्तार से इस टनल में वाहन दौड़ सकेंगे। अटल टनल को बेहद आधुनिक तरीके से बनाया गया है।

मनाली से केलांग जाने में 6 घंटे का समय बचेगा
टनल ने लाहौल के लोगों की जीवन शैली में बदलाव की दस्तक दी है। लोगों के लिए सर्दी के 6 महीने अब जिले से बाहर जाने में बाधा नहीं बनेंगे। लोगों को अब बर्फीली रोहतांग दर्रा होकर कुल्लू का रुख नहीं करना होगा। 10 हजार फुट की ऊंचाई पर बनी 9.02 किलोमीटर लंबी टनल से लाहौल के लोग मनाली के धुंधी साउथ पोर्टल में निकलेंगे और उसके बाद मनाली होते हुए कुल्लू और अन्य जिलों का रुख कर सकेंगे।

क्या-क्या है इस टनल में…
मुख्य कैरेज-वे मार्ग के दोनों ओर 55 फुट के फुटपाथ हैं। एक और एचडी यानी हाईटेंशन वायर और दूसरी ओर एलटी केबल डाली गई है। एलटी केबल से टनल के भीतर की लाइट व्यवस्था का जिम्मा है।

वाजपेयी और अर्जुन की दोस्ती की मिसाल है अटल टनल
पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी और जनजातीय जिला लाहौल स्पीति के ठोलंग गांव के अर्जुन गोपाल उर्फ टशी दावा की दोस्ती के किस्से लाहुल के लोग बड़ी शान से सुनाते हैं। रोहतांग की पहाड़ी काटकर विश्व की सबसे ऊंचाई पर बनी टनल को अटल और गोपाल की दोस्ती का प्रतिफल माना जाता है। लाहौल स्पीति जिला के लिंडूर निवासी ओम प्रकाश बौद्ध का कहना है कि अगर वाजपेयी और अर्जुन गोपाल उर्फ टशी दावा की दोस्ती नहीं होती तो शायद ही यह टनल बन पाती। हालांकि टनल निर्माण की मांग पंडित ज्वाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के जमाने में महसूस हो रही थी लेकिन इस टनल को मूर्त रूप देने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल विहारी वाजपेयी को ही जाता है।


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