बैडमिंटन में छत्तीसगढ़ की बेटी का कमाल: साइना को हराने वाली मालविका को दुर्ग की आकर्षी ने दी मात, बोलीं-अब ओलंपिक में गोल्ड जीतना है

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दुर्गएक घंटा पहले

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आकर्षी ने 8 साल की उम्र में प्रैक्टिस शुरू की थी। - Dainik Bhaskar

आकर्षी ने 8 साल की उम्र में प्रैक्टिस शुरू की थी।

दुर्ग की बैडमिंटन प्लेयर आकर्षी कश्यप ने नई दिल्ली में चल रहे इंडिया ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप में बड़ा उलटफेर किया है। आकर्षी ने क्वार्टर फाइनल में साइना नेहवाल को हराने वाली महाराष्ट्र की मालविका बंसोड़ को मात दी है। इस मैच के बाद उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा कि उनका लक्ष्य है कि वह पेरिस में होने वाले 2024 ओलंपिक गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करें और देश के लिए गोल्ड जीतकर लाएं।

शुक्रवार को 20 वर्षीय आकर्षी ने मालविका बंसोड़ को 21-12, 21-15 से हराया । विश्व में 76वें स्थान की रैंकिग के साथ खेलने वाली छत्तीसगढ़ राज्य की इकलौती खिलाड़ी आकर्षी की रैंकिंग इस मैच के बाद सुधरेगी। वो लगातार दो सालों से सीनियर रैंकिंग में इंडिया नंबर-1 बनीं हुई हैं। उसकी यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई क्योंकि मालविका ने एक दिन पहले ही ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल को इसी टूर्नामेंट में हराया था। इस जीत के साथ आकर्षी इंडिया ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप के सेमी फाइनल में पहुंच गई हैं।

आकर्षी कश्यप शॉट मारते हुए।

आकर्षी कश्यप शॉट मारते हुए।

सफलता का श्रेय माता-पिता का साथ
इस सफलता का श्रेय आकर्षी ने अपने मम्मी पापा को देती हैं। आकर्षी के पापा डाक्टर संजीव कश्यप दुर्ग में ही डर्मेटोलॉजिस्ट हैं। उन्होंने ही आकर्षी को टाइम की वैल्यू बताई। जब से उसने बैडमिंटन खेलना शुरू किया वह रोज उसे सुबह 4 बजे उठाते थे और उसके बाद उसे प्रैक्टिस में लेकर जाते थे। ट्रेनिंग के दौरान भी वह उसके साथ ही रहते थे। बाद में उसकी लगन और प्रतिभा देखकर उसे एडवांस ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद भेजा गया।

आकर्षी के साथ हर टूर्नामेंट में उसकी मां जाती हैं। वहां वह उसकी न्यूट्रीशन का पूरा ध्यान रखती हैं। आकर्षी अंडर-15 सिंगल्स में नेशनल चैंपियन, अंडर-17 और 19 सिंगल्स में दो बार नेशनल चैंपियन, खेलो इंडिया में गोल्ड मेडलिस्ट, एशियन गेम्स में गोल्ड मेडलिस्ट, बहरीन इंटरनेशनल चैलेंज में ब्रॉन्ज जीत चुकी हैं। उनके नाम अब तक 50 गोल्ड मेडल, 22 सिल्वर मेडल और 15 ब्रॉन्ज मेडल हैं।

आकर्षी सामने वाली खिलाड़ी के शॉट का जवाब देते हुए।

आकर्षी सामने वाली खिलाड़ी के शॉट का जवाब देते हुए।

हैदराबाद से घर आने पर भी नहीं छोड़ती प्रैक्टिस
आकर्षी ने बताया कि वह अभी हैदराबाद सुचित्रा बैडमिंटन एकेडमी में प्रैक्टिस करती हैं। वहां से जब अपने घर दुर्ग आती हैं तो अपने कॉलेज में प्रैक्टिस करती हैं। कॉलेज में उनके कोच शिवयोगी हैं। रोजाना सुबह 4 बजे उठकर वह ट्रेनिंग करने जाती हैं। 9 से 11 बजे तक जिम और इसके बाद दोपहर 2:30 से 5 बजे तक बैडमिंटन कोर्ट में प्रैक्टिस करती हैं।

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8 साल की उम्र में शुरू किया था खेलना
आकर्षी कश्यप ने 8 साल से बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। भिलाई इंडोर स्टेडियम में प्रैक्टिस करके अपनी लगन और कड़ी मेहनत की बदौलत उन्होंने स्टेट लेवल और नेशनल लेवल में अच्छा परफॉर्म किया। साल 2014 में वे अंडर-15 नेशनल चैंपियन बनीं। 2 बार अंडर-17 नेशनल चैंपियन रहीं। 2 बार अंडर-19 चैम्पियन रह चुकी हैं। 2018 इंटरनेशनल गेम में इंडिया को रिप्रेजेंट किया।

ओलंपिक में गोल्ड लाना है लक्ष्य
आकर्षी का टारगेट ओलपिंक गेम्स में गोल्ड मेडल लाना है। वह कड़ी मेहनत कर अपनी रैंकिंग को सुधारने में लगी हैं, जिससे वे 2024 में होने वाले पेरिस ओलंपिंक और 2028 ओलंपिक में भाग लेकर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें।

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