मुख्यमंत्री ने कहा, एसएमसी शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट में कानूनी मदद करेगी सरकार

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शिमलाएक घंटा पहले

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राज्य सरकार 2555 एसएमसी शिक्षकों की सुप्रीम कोर्ट में कानूनी मदद करेगी। ये शिक्षक दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देते थे। इन एसएमसी शिक्षकों के मामले में कानूनी पेचीदगियां हैं और इन्हें ठीक करने में समय लगेगा। ये बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक आशा कुमारी के नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर किए एक सवाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के अनुपूरक सवाल के जवाब में कही। अग्निहोत्री ने कहा कि इन एसएमसी शिक्षकों के भविष्य को लेकर क्या सरकार चिंतित है व क्या सरकार इनके मामले पर कोर्ट में जा रही है, इस पर शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि वे शिक्षा विभाग में नए हैं और उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

अभी विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति का है, ऐसे में जब एसएमसी शिक्षकों का सवाल आएगा, उस समय इसका जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि इससे पहले सरकार ने पीटीए, पैट और पैरा शिक्षकों के मामले को लेकर मानवीय दृष्टिकोण से जो मदद कर सकते थे, वह की है। उन्होंने कहा कि इस मामले पर निर्णय आने के बाद उन सारी श्रेणियों पीटीए, पैट की सेवाएं रेगुलर करने का निर्णय लिया गया। इनकी रिव्यू पटिशन हाईकोर्ट में एडमिट नहीं हुई है। अब सुप्रीम कोर्ट में जाने पर सरकार विचार कर रही है।

आशा कुमारी ने किया प्रदेश में नई शिक्षा नीति और मातृभाषा को लेकर सवालः.नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर कांग्रेस सदस्य आशा कुमारी ने सवाल किया था कि यह पाॅलिसी कब से लागू होगी और हिमाचल में मातृभाषा किसे मानेंगे और इसमें पढ़ाने का क्या प्रावधान रखेंगे। साथ पूछा कि क्या निजी स्कूलों में भी लागू होगा। शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा कि नई नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करेंगे और इसकी टास्क फोर्स का गठन कर दिया है, 13 सितंबर को बैठक है।

हिमाचल की मातृभाषा हिंदी है और धीरे-धीरे स्थानीय बोलियों के शिक्षक भी रखे जाएंगे, फिर बोलियों में भी शिक्षा देंगे। निजी स्कूल भी इसके दायरे में आएंगे। वहीं आशा कुमारी ने सुझाव दिया कि विधायकों की एक कमेटी बनाकर उनके सुझाव लिए जाएं और इसे कैसे लागू करना है इस पर चर्चा हो। इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श करने के बाद इस सुझाव पर भी विचार किया जाएगा।

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