आलू (फाइल फोटो)

वैज्ञानिकों का कमाल: आठ माह तक स्टोर हो सकेगा आलू, नहीं बिगड़ेगा स्वाद

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विपिन काला, अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 19 Jan 2022 11:32 AM IST

सार

अभी तक आलू भंडारण के लिए उपयोग में लाए जा रहे पुराने स्प्रे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माने गए हैं। विश्व के कई देशों ने पुरानी विधि से आलू भंडारण के लिए छिड़काव पर प्रतिबंध लगाया है। इस कारण से सीपीआरआई के वैज्ञानिकों ने आलू को अधिक समय तक भंडारण के लिए स्वास्थ्य के दृष्टिगत नई विधि से स्प्रे तैयार किए हैं।

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देश के किसानों को आठ माह तक आलू भंडारण में अब दिक्कत नहीं आएगी। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) के वैज्ञानिकों ने खाद्य तेलों से छिड़काव की नई कारगर विधि ईजाद कर ली है। अब आलू में आठ माह तक अंकुर नहीं आएंगे और न ही आलू का स्वाद बिगड़ेगा। संस्थान ने इस विधि का पेटेंट कराने को आवेदन भी कर लिया है। वैज्ञानिक स्प्रे को लेकर कई अन्य पहलुओं का अध्ययन करे रहे हैं। इसके बाद यह नई विधि आलू उत्पादकों के लिए उपलब्ध कर दी जाएगी। 

अभी तक आलू भंडारण के लिए उपयोग में लाए जा रहे पुराने स्प्रे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माने गए हैं। विश्व के कई देशों ने पुरानी विधि से आलू भंडारण के लिए छिड़काव पर प्रतिबंध लगाया है। इस कारण से सीपीआरआई के वैज्ञानिकों ने आलू को अधिक समय तक भंडारण के लिए स्वास्थ्य के दृष्टिगत नई विधि से स्प्रे तैयार किए हैं। संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक 40 दिन तक आलू को सही तरीके से भंडारित किया जा सकता था। नई विधि से सिर्फ एक बार ही स्प्रे करके भोज्य (खाने योग्य) और बीज आलू को आठ माह तक कोल्ड स्टोर में सुरक्षित रखा जा सकेगा। 

पुराने स्प्रे में खर्चा कम और जोखिम ज्यादा
सीपीआरआई के स्प्रे की विधि में भले ही खर्चा ज्यादा है, लेकिन स्वास्थ्य संबंधित खतरे नहीं हैं। पुरानी स्प्रे की विधि में खर्चा तो कम है, लेकिन स्वास्थ्य संबंधित जोखिम ज्यादा है। नई विधि से स्प्रे का खर्चा डेढ़ रुपये प्रति किलो आता है, जबकि पुरानी विधि में 20 पैसे प्रति किलो खर्चा आता है। नया स्प्रे एक बार और पुराना स्प्रे दो बार करना पड़ता है। 

संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. अरविंद जायसवाल कहते हैं कि वैज्ञानिकों ने खाद्य तेलों से स्प्रे तैयार किया है और यह आलू को आठ माह तक भंडारण करने में मदद करेगा। अभी तक जो स्प्रे आलू भंडारण के लिए किया जाता है, उसे विदेशों में प्रतिबंध किया है। इस स्प्रे से आलू का स्वाद भी नहीं बदलेगा और न ही लंबे समय तक अंकुर आएंगे।

विस्तार

देश के किसानों को आठ माह तक आलू भंडारण में अब दिक्कत नहीं आएगी। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) के वैज्ञानिकों ने खाद्य तेलों से छिड़काव की नई कारगर विधि ईजाद कर ली है। अब आलू में आठ माह तक अंकुर नहीं आएंगे और न ही आलू का स्वाद बिगड़ेगा। संस्थान ने इस विधि का पेटेंट कराने को आवेदन भी कर लिया है। वैज्ञानिक स्प्रे को लेकर कई अन्य पहलुओं का अध्ययन करे रहे हैं। इसके बाद यह नई विधि आलू उत्पादकों के लिए उपलब्ध कर दी जाएगी। 

अभी तक आलू भंडारण के लिए उपयोग में लाए जा रहे पुराने स्प्रे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माने गए हैं। विश्व के कई देशों ने पुरानी विधि से आलू भंडारण के लिए छिड़काव पर प्रतिबंध लगाया है। इस कारण से सीपीआरआई के वैज्ञानिकों ने आलू को अधिक समय तक भंडारण के लिए स्वास्थ्य के दृष्टिगत नई विधि से स्प्रे तैयार किए हैं। संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक 40 दिन तक आलू को सही तरीके से भंडारित किया जा सकता था। नई विधि से सिर्फ एक बार ही स्प्रे करके भोज्य (खाने योग्य) और बीज आलू को आठ माह तक कोल्ड स्टोर में सुरक्षित रखा जा सकेगा। 

पुराने स्प्रे में खर्चा कम और जोखिम ज्यादा

सीपीआरआई के स्प्रे की विधि में भले ही खर्चा ज्यादा है, लेकिन स्वास्थ्य संबंधित खतरे नहीं हैं। पुरानी स्प्रे की विधि में खर्चा तो कम है, लेकिन स्वास्थ्य संबंधित जोखिम ज्यादा है। नई विधि से स्प्रे का खर्चा डेढ़ रुपये प्रति किलो आता है, जबकि पुरानी विधि में 20 पैसे प्रति किलो खर्चा आता है। नया स्प्रे एक बार और पुराना स्प्रे दो बार करना पड़ता है। 

संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. अरविंद जायसवाल कहते हैं कि वैज्ञानिकों ने खाद्य तेलों से स्प्रे तैयार किया है और यह आलू को आठ माह तक भंडारण करने में मदद करेगा। अभी तक जो स्प्रे आलू भंडारण के लिए किया जाता है, उसे विदेशों में प्रतिबंध किया है। इस स्प्रे से आलू का स्वाद भी नहीं बदलेगा और न ही लंबे समय तक अंकुर आएंगे।



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