सेना लद्दाख में बोफोर्स तोपें तैनात करने की तैयारी कर रही; इन तोपों ने 21 साल पहले पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध जिताया था

Posted on

  • Hindi News
  • National
  • India China; India China Border Tension Latest News Update | Indian Army Preparing To Deploy Bofors Gun In Ladakh

लद्दाख7 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

बोफोर्स तोपें 1980 में सेना में शामिल की गई थीं। ये लो और हाई दोनों एंगल से फायरिंग कर सकती हैं। (फाइल फोटो)

  • लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच बीते 20 दिन में 3 बार गोलियां चलीं
  • कारगिल की जंग में बोफोर्स ने ऊंची पहाड़ियों पर बने पाकिस्तान के बंकर आसानी से तबाह कर दिए थे

पूर्वी लद्दाख में चीन की घुसपैठ की कोशिशों के चलते भारत-चीन के बीच तनाव चरम पर है। इस बीच भारतीय सेना वहां बोफोर्स होवित्जर तोपें तैनात करने की तैयारी कर रही है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने बुधवार को यह जानकारी दी। इसके मुताबिक, सेना के इंजीनियर बोफोर्स तोपों की सर्विसिंग में जुटे हैं। ये तोपें कुछ दिनों में बॉर्डर पर तैनात कर दी जाएंगी।

बोफोर्स तोपों ने पाकिस्तान का भारी नुकसान किया था
बोफोर्स तोपें 1980 में सेना में शामिल की गई थीं। ये लो और हाई एंगल से फायरिंग कर सकती हैं। ये तोपें कई युद्ध जिताने में मददगार रही हैं। 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल की जंग जिताने में भी इनकी अहम भूमिका रही थी। बोफोर्स तोपों ने बहुत ज्यादा ऊंची पहाड़ियों पर बने पाकिस्तान के बंकरों और ठिकानों को आसानी से तबाह कर दिया था। इससे पाकिस्तान की सेना को भारी नुकसान हुआ था।

फॉरवर्ड लोकेशंस पर आर्मी की तैयारियों के सिलसिले में सर्विसिंग और मेंटेनेंस के काम को लेकर लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीति कंवर ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्कशॉप में आर्मी के इंजीनियर उन हथियारों के मेंटेनेंस का ध्यान रखते हैं, जिनकी विशेष परिस्थितियों में जरूरत होती है। टेक्निकल स्टोर ग्रुप्स एक टैंक की फायरिंग पिन से लेकर इंजन तक हर चीज मुहैया करवाते हैं। मोबाइल स्पेयर्स वैन के जरिए हम फॉरवर्ड इलाकों में टेक्नीशियंस को कंपोनेंट पहुंचाते हैं।

भारत-चीन सीमा पर पिछले 20 दिन में 3 बार गोलियां चलीं
लद्दाख में भारत-चीन के बीच मई से तनाव बना हुआ है। 15 जून को गलवान में दोनों देशों की झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। चीन के 40 से ज्यादा सैनिक मारे गए, लेकिन उसने कबूला नहीं। ताजा विवाद 29-30 अगस्त की रात से शुरू हुआ, जब चीन ने पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी छोर की पहाड़ी पर कब्जे की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय जवानों नाकाम कर दी। बीते 20 दिन में दोनों तरफ से 3 बार हवा में गोलियां चल चुकी हैं।

पहली बार: 29-31 अगस्त के बीच पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी छोर पर
दूसरी बार: 7 सितंबर को मुखपारी हाइट्स इलाके में
तीसरी बार: 8 सिंतबर को पैंगॉन्ग झील के उत्तरी छोर पर

0


Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *