National Hockey Player Subhash Chand Make Shoes In Hamirpur Himachal Pradesh – किस्मत से हारा: आठ बार का नेशनल खिलाड़ी जूते सिल कर कमा रहा रोजी-रोटी, अनुराग के खेल मंत्री बनने पर जगी उम्मीद


अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 01 Aug 2021 08:33 PM IST

सार

90 के दशक में आठ बार विभिन्न वर्गों में नेशनल खेल चुके सुभाष चंद जिला मुख्यालय हमीरपुर के मुख्य बाजार में जूतों की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं।

सुभाष चंद हमीरपुर में जूतों की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं।
– फोटो : अमर उजाला

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केंद्रीय युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के गृह जिला हमीरपुर में आठ बार हॉकी का नेशनल खेल चुका एक खिलाड़ी जूते सिलकर अपनी रोजी-रोटी चला रहा है। इस खिलाड़ी ने एक नहीं दो नहीं, बल्कि आठ बार हॉकी में हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है, लेकिन सरकार से इसे इसके बदले कुछ नहीं मिला है। परिवार पालने के लिए यह हमीरपुर में जूतों की दुकान चला रहा है। 

90 के दशक में आठ बार विभिन्न वर्गों में नेशनल खेल चुके सुभाष चंद जिला मुख्यालय हमीरपुर के मुख्य बाजार में जूतों की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। सरकार की बेरुखी का शिकार हुए सुभाष अब खेलना भी छोड़ चुके हैं और अपने बच्चों को ही खेलों से दूर ही रखा है। सुभाष का कहना है कि अनुराग ठाकुर अब खेल मंत्री बने हैं तो थोड़ी उम्मीद उन्हें जगी हैं।

उन्होंने कहा कि उनका तो अब समय निकल गया है, लेकिन उनको उम्मीद है कि उनके बेटे के लिए कुछ न कुछ सरकार करेगी। इससे पहले भी कई मंचों पर सुभाष चंद के लिए नौकरी की कई सामाजिक संगठन मांग उठा चुके हैं। यहां तक कि प्रधानमंत्री को भी इस बाबत पत्र लिखे जा चुके हैं। लेकिन कहीं भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। 

विस्तार

केंद्रीय युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के गृह जिला हमीरपुर में आठ बार हॉकी का नेशनल खेल चुका एक खिलाड़ी जूते सिलकर अपनी रोजी-रोटी चला रहा है। इस खिलाड़ी ने एक नहीं दो नहीं, बल्कि आठ बार हॉकी में हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है, लेकिन सरकार से इसे इसके बदले कुछ नहीं मिला है। परिवार पालने के लिए यह हमीरपुर में जूतों की दुकान चला रहा है। 

90 के दशक में आठ बार विभिन्न वर्गों में नेशनल खेल चुके सुभाष चंद जिला मुख्यालय हमीरपुर के मुख्य बाजार में जूतों की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। सरकार की बेरुखी का शिकार हुए सुभाष अब खेलना भी छोड़ चुके हैं और अपने बच्चों को ही खेलों से दूर ही रखा है। सुभाष का कहना है कि अनुराग ठाकुर अब खेल मंत्री बने हैं तो थोड़ी उम्मीद उन्हें जगी हैं।

उन्होंने कहा कि उनका तो अब समय निकल गया है, लेकिन उनको उम्मीद है कि उनके बेटे के लिए कुछ न कुछ सरकार करेगी। इससे पहले भी कई मंचों पर सुभाष चंद के लिए नौकरी की कई सामाजिक संगठन मांग उठा चुके हैं। यहां तक कि प्रधानमंत्री को भी इस बाबत पत्र लिखे जा चुके हैं। लेकिन कहीं भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। 



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